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जँ हम मरि जाइ कनिको नहि अहाँ कानब - गजल  

मैथिलीपुत्र: सभसँ आगू-आगू छी

मैथिलीपुत्र: सभसँ आगू-आगू छी : के  कहैत अछि निर्धन छी हम   थाकल हारल मारल छी   हम छी मैथिलीपुत्र   दुनियामे सभसँ आगू-आगू छी।   देखू   श्रृष्टिक     संगे देलहुँ...