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बीहनि कथाक पोथी आ कथाकार

मैथिली साहित्यमे आइ बीहनि कथाक स्थान आ खगता दुनूक बेगरता अछि। आ समय संगे पाछाँक दू दशकमे बीहनि कथा अपन एकटा नव स्थानेटा नहि बना कऽ पाठकक मोनमे एकटा जिज्ञासा बना लेलक, जे आबय बला समयमे बीहनि कथाक संसार अपन बालावस्थासँ जबानीटा नहि वरन साहित्यक अँगनाक एकटा यशस्वी विधा बनत। हम ओहि सुखद समयसँ छी, जे बीहनि कथाकेँ बालावस्थामे बढ़ैत आ खेलाइत, युवावस्थाक दिस डेग बढ़बैत देख रहल छी। आइ नित्य नव-नव बीहनि कथा आ बीहनि कथाक पोथी लिखल जा रहल अछि। किछु प्रमुख बीहनि कथाक पोथी आ बीहनि कथाकारक विवरण नीचाँ देल जा रहल अछि - १. पोथी - क्षणिका , बीहनि कथाकार - अमरनाथ , प्रकाशन वर्ष - १९७५ , प्रकाशक - मैथिली रचना मंच, दरभंगा।   २. पोथी - कल्प-गुच्छ , बीहनि आ लघु कथा संग्रह, कथाकार - गजेन्द्र ठाकुर , प्रकाशन वर्ष - २००९ , प्रकाशक - श्रुति प्रकाशन।   ३. पोथी - प्रतीक , बीहनि कथाकार - मुन्ना जी , प्रकाशन वर्ष - २०१२ , प्रकाशक - श्रुति प्रकाशन।   ४. पोथी - त्रिवेणीक रंग , बीहनि आ लघु कथा संग्रह - कथाकार राजदेव मंडल , प्रकाशन वर्ष - २०१४ , प्रकाशक - श्रुति प्रकाशन।   ५. पोथी - उलहन , बीहनि कथाका...
जँ हम मरि जाइ कनिको नहि अहाँ कानब - गजल  

मैथिलीपुत्र: सभसँ आगू-आगू छी

मैथिलीपुत्र: सभसँ आगू-आगू छी : के  कहैत अछि निर्धन छी हम   थाकल हारल मारल छी   हम छी मैथिलीपुत्र   दुनियामे सभसँ आगू-आगू छी।   देखू   श्रृष्टिक     संगे देलहुँ...

आजुक बरसाइत

पतिकेँ अपन आंगुरपर नचबै बाली, सेहो आइ बरसाइत करै छथि। ठठड़ी बला कही-कही कऽ, जे ठठड़ी बना देलनि, सेहो आइ बरसाइत करै छथि।   मॉडल युग मे, मॉडलो सभ आइ बरसाइत करै छथि। होकती कोना आँचरसँ बियनि, जिंसो बाली आइ बरसाइत करै छथि।   पुरुषक राजमे बाहर सुरक्षित नहि छली स्त्री, स्त्री राजमे आइ घर-घरमे असुरक्षित अछि पुरुष। असुरक्षित पुरुषक, जोरगर सेहो आइ बरसाइत करै छथि।   सत्य-निष्ठा पतिव्रताक पावनि, बनल जकर आइ मखौल अछि। किछु तँ नव साड़ी लेल, सेहो आइ बरसाइत करै छथि।   एक सावित्री मुइल पति केर जियाबक सामर्थ्य रखैत छली, आइ लाखों जीबैतकेँ मरनासन्न लेस बरसाइत करै छथि। एक दिनक वर्तसँ नहि चिरंजीवी हेता आजुक सत्यवान, हुनका चाहियनि घरमे प्रेम, आदर आ सम्मान।   हे मातृशक्ति! अहाँ श्रेष्ठ छलौं, श्रेष्ठ छी आ श्रेष्ठ रहब, काली, दुर्गा, रनचंडी अहीं छी। परञ्च एहि रूपकेँ राखू स्वधर्म रक्षा लेल, घरमे रहूँ लक्ष्मी बनि हँसैत अपन विष्णु संग।   अहाँक हँसैत ई लक्ष्मी रूपक सौंझा, कोन यमराजक पावर विष्णुसँ लड़ता? पूज्य छथि सत्यवानक सावित्री, पूज्य छथि पतिक हियामे बस...

जगदानन्द झा ‘मनु’ केर संक्षिप्त परिचय

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जगदानन्द झा 'मनु' पिता  -   स्वर्गीय   राज   कुमार   झा माता -  श्रीमती   मंजू   देवी जन्म   तिथि   आ   स्थान   -   १३   नवम्बर;   १९७३, हरिपुर   डीहटोल, मधुबनी। शिक्षा-  बिजनेसमे   स्नातक  दिल्ली   विश्वविद्यालयसँ।  इलेक्ट्रानिक्स   आ   कम्पयूटर   हार्डवेयरमे   डिप्लोमा।  वृति  -   प्रोफेसनल   नेटवर्कर   आ   बिजनेस   लीडर पैतृक   गाम  -   हरिपुर   डीहटोल, मधुबनी। वर्तमान   निवास - दिल्ली। ई   मेल- jagdanandjha@gmail.com  फ़ेसबुक -  https://www.facebook.com/jnjmanu साहित्यिक   उपलब्धि  - ( क )  इसा सन् 2010 सँ विदेह ई-पत्रिकाक संगहि संग विभिन्न, वेबसाइट, ब्लॉग आ प्रिंट-पत्रिका सभमे हिनकर गजल, कविता, बीहनि कथा,  कथा आ आलेख आदि प्रकाशित भऽ रहल छनि । दिल्लीसँ प्रकाशित होए बला मैथिली पत्रिका, मिथिलांचल टुडेमे संपादकीय सहयोगक पदभार देखने छथि। मैथिलीक चर्चित ब्ल...